Paper 7 : 1.1 Nature of Education ,Meaning and definition of education - Special Education Notes

अध्याय 1: शिक्षा का स्वरूप



1.1 शिक्षा: अर्थ, परिभाषा एवं क्षेत्र

1. शिक्षा का परिचय

शिक्षा मानव सभ्यता का वह आधारस्तंभ है जिस पर व्यक्ति और समाज दोनों का विकास निर्भर करता है। यह एक गतिशील और बहुआयामी प्रक्रिया है जो मनुष्य को केवल साक्षर ही नहीं बनाती, बल्कि उसे जीवन के विविध पहलुओं से परिचित कराते हुए एक सभ्य, संवेदनशील और उत्पादक नागरिक के रूप में ढालती है।

विशेषताएँ:

  • शिक्षा एक आजीवन चलने वाली प्रक्रिया (Lifelong Process) है।
  • यह ज्ञान, कौशल और मूल्यों का समन्वय करती है।
  • यह व्यक्ति और समाज के बीच सेतु का कार्य करती है।
  • शिक्षा का उद्देश्य सर्वांगीण विकास (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आध्यात्मिक) है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

"शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।" — नेल्सन मंडेला

2. शिक्षा का अर्थ (Meaning of Education)

शिक्षा शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत की "शिक्ष्" धातु से हुई है, जिसका अर्थ है "सीखना या सिखाना"। हिंदी में 'विद्या' और अंग्रेजी में 'Education' (लैटिन शब्द Educare = "प्रकाशित करना") शब्द का प्रयोग होता है।

विभिन्न विद्वानों के अनुसार शिक्षा की परिभाषा:

विद्वान परिभाषा
महात्मा गांधी "शिक्षा से तात्पर्य बालक के शरीर, मन और आत्मा के सर्वांगीण विकास से है।"
स्वामी विवेकानंद "शिक्षा मनुष्य में निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है।"
जॉन ड्यूवी "शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि स्वयं जीवन है।"
रवींद्रनाथ टैगोर "शिक्षा वह है जो हमें स्वतंत्र विचारक और रचनात्मक बनाती है।"

शिक्षा के विभिन्न आयाम:

  • संकीर्ण अर्थ (Narrow Meaning):
    • केवल औपचारिक शिक्षा (स्कूल, कॉलेज) तक सीमित।
    • पुस्तकीय ज्ञान पर बल।
  • व्यापक अर्थ (Broad Meaning):
    • जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया।
    • अनौपचारिक (परिवार, समाज) और निरौपचारिक (Self-learning) शिक्षा शामिल।

3. शिक्षा का क्षेत्र (Scope of Education)

शिक्षा का क्षेत्र अत्यंत विस्तृत है और यह निम्नलिखित क्षेत्रों में अपना प्रभाव दर्शाती है:

(A) व्यक्तिगत विकास (Individual Development)

  • बौद्धिक विकास: तर्कशक्ति, विश्लेषण क्षमता।
  • शारीरिक विकास: स्वास्थ्य एवं कौशल विकास।
  • नैतिक विकास: सत्य, अहिंसा, ईमानदारी जैसे मूल्य।

(B) सामाजिक विकास (Social Development)

  • सामाजिक एकता एवं सहयोग को बढ़ावा।
  • संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण।
  • लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रसार।

(C) राष्ट्रीय विकास (National Development)

  • शिक्षित नागरिक राष्ट्र की प्रगति में योगदान देते हैं।
  • आर्थिक विकास (Skilled Workforce)।
  • वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति।

(D) व्यावसायिक विकास (Vocational Development)

  • रोजगारोन्मुखी शिक्षा (Skill-Based Learning)।
  • उद्यमिता (Entrepreneurship) को प्रोत्साहन।

(E) वैश्विक परिप्रेक्ष्य (Global Perspective)

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और शांति।
  • पर्यावरण जागरूकता एवं सतत विकास।

निष्कर्ष

शिक्षा एक ऐसी सशक्त प्रक्रिया है जो व्यक्ति को ज्ञान, कौशल और मूल्यों से समृद्ध करते हुए उसे एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाती है। इसका दायरा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू को प्रभावित करती है। आधुनिक युग में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाना है।


प्रश्नावली (Discussion Points):

  1. शिक्षा के संकीर्ण और व्यापक अर्थ में क्या अंतर है?
  2. शिक्षा किस प्रकार सामाजिक परिवर्तन में सहायक होती है?
  3. "शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि स्वयं जीवन है।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।

इस प्रकार, यह अध्याय शिक्षा के मूलभूत सिद्धांतों को स्पष्ट करता है, जो आगे के अध्ययन के लिए आधार प्रदान करेगा।

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