CBR file : D.ed Sepeca education ( HI) Community Based Rehabilitation File



1. CBR का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

CBR यानी "समुदाय आधारित पुनर्वास" (Community Based Rehabilitation) की शुरुआत 1970 के दशक में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा की गई थी। उस समय विकासशील देशों में दिव्यांग व्यक्तियों (PWDs) के लिए स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास केवल अस्पतालों या विशेष केंद्रों तक सीमित थीं। यह व्यवस्था न तो सस्ती थी, न ही सबके लिए सुलभ।

WHO ने यह महसूस किया कि जब तक दिव्यांगजनों को उनकी अपनी समुदाय (community) में सहायता नहीं मिलेगी, तब तक उनका पूर्ण विकास और समावेशन संभव नहीं है। इसी सोच के तहत 1980 में CBR को एक रणनीति के रूप में विकसित किया गया, जिसका उद्देश्य था:

  • दिव्यांगजनों को उनके घर और समुदाय में पुनर्वास सेवाएं प्रदान करना,

  • समाज में उनकी भागीदारी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना,

  • और उन्हें शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में मुख्यधारा से जोड़ना।

शुरुआत में CBR का प्रयोग कुछ देशों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया गया था, लेकिन इसके सकारात्मक परिणामों के बाद इसे वैश्विक स्तर पर अपनाया जाने लगा। आज CBR एक व्यापक सामाजिक आंदोलन बन चुका है जो सिर्फ दिव्यांगजनों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के कल्याण के लिए काम करता है।


2. CBR की परिभाषा, अवधारणाएं और आवश्यकताएं

परिभाषा (Definition)

CBR यानी Community Based Rehabilitation का अर्थ है – समुदाय आधारित पुनर्वास। यह एक ऐसी रणनीति है जिसके अंतर्गत दिव्यांग व्यक्तियों को उनके घर, गांव, और मोहल्ले में ही आवश्यक सेवाएं, समर्थन और अवसर प्रदान किए जाते हैं ताकि वे स्वावलंबी बन सकें और समाज में गरिमा के साथ जीवन यापन कर सकें।

WHO के अनुसार:
CBR एक ऐसी प्रक्रिया है जो स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सामाजिक और सशक्तिकरण के क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए समुदायों को सक्षम बनाती है।


अवधारणाएं (Concepts)

CBR की मूल अवधारणाएं निम्नलिखित हैं:

  • समुदाय की भागीदारी: CBR में परिवार, स्थानीय लोग, स्वयंसेवी संगठन और सरकार — सभी मिलकर दिव्यांग व्यक्ति की सहायता करते हैं।

  • समावेशन: CBR का मुख्य उद्देश्य है कि दिव्यांग व्यक्ति समाज की मुख्यधारा में शामिल हों और भेदभाव से मुक्त जीवन जिएं।

  • सशक्तिकरण (Empowerment): दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना ताकि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े हो सकें और निर्णय लेने में सक्षम हों।

  • बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण: केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा आदि सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।


आवश्यकता (Need of CBR)

CBR की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि:

  1. ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में सेवाएं नहीं पहुंच पातीं।

  2. अस्पताल आधारित पुनर्वास महंगा और सीमित होता है।

  3. CBR दिव्यांगजनों को उनके घर पर ही मदद देता है।

  4. यह समाज में जागरूकता लाता है और भेदभाव को कम करता है।

  5. CBR से पूरे समुदाय का विकास होता है, न कि सिर्फ एक व्यक्ति का।


3. CBR के सिद्धांत (Principles of CBR)

CBR यानी "समुदाय आधारित पुनर्वास" का आधार कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर टिका हुआ है। ये सिद्धांत सुनिश्चित करते हैं कि दिव्यांगजनों को सम्मान, अवसर और समाज में समान भागीदारी मिल सके। नीचे दिए गए हैं CBR के प्रमुख सिद्धांत:


1. समानता (Equality)

हर व्यक्ति, चाहे वह दिव्यांग हो या नहीं, समाज में बराबरी का हकदार है। CBR इस विचार को बढ़ावा देता है कि सभी को समान अवसर और व्यवहार मिलना चाहिए।

2. समावेशन (Inclusion)

CBR इस बात पर ज़ोर देता है कि दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के हर क्षेत्र – शिक्षा, रोजगार, सामाजिक गतिविधियों आदि में पूरी तरह शामिल किया जाए।

3. सहभागिता (Participation)

CBR में दिव्यांग व्यक्ति और उनके परिवार को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। यह केवल सेवा देना नहीं, बल्कि सेवा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

4. सशक्तिकरण (Empowerment)

CBR का उद्देश्य है दिव्यांगजनों को इतना सक्षम बनाना कि वे अपने जीवन के फैसले स्वयं ले सकें और अपने अधिकारों के लिए खड़े हो सकें।

5. बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण (Multi-Sectoral Approach)

CBR केवल एक क्षेत्र (जैसे स्वास्थ्य) तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह शिक्षा, आजीविका, सामाजिक समावेशन और सशक्तिकरण जैसे विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ता है।

6. समुदाय की भागीदारी (Community Involvement)

CBR समुदाय-आधारित होता है, इसलिए स्थानीय लोग, परिवार, पंचायतें, स्कूल और NGOs – सभी की भागीदारी से यह कार्य करता है।


ये सिद्धांत मिलकर CBR को एक मजबूत और व्यावहारिक रणनीति बनाते हैं जो न सिर्फ दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता करता है, बल्कि पूरे समाज को समावेशी और संवेदनशील बनाता है।


आगया भाई अगला पॉइंट —
Topic 4: Steps of CBR (CBR के चरण)
यह बहुत ज़रूरी टॉपिक है क्योंकि इससे पता चलता है कि CBR को ज़मीन पर कैसे लागू किया जाता है — स्टेप बाय स्टेप।


4. CBR के चरण (Steps of CBR)

CBR को किसी भी क्षेत्र में लागू करने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। ये चरण दिव्यांगजनों की पहचान से लेकर पुनर्वास और सशक्तिकरण तक सभी स्टेप्स को कवर करते हैं। आइए जानें CBR के मुख्य चरण:


1. समुदाय का सर्वेक्षण (Community Survey)

सबसे पहले उस क्षेत्र का सर्वे किया जाता है जहाँ CBR लागू किया जाना है। इसमें यह जाना जाता है कि कितने लोग दिव्यांग हैं, किस प्रकार की समस्याएं हैं, और कौन-कौन से संसाधन उपलब्ध हैं।

2. आवश्यकता की पहचान (Need Identification)

इसके बाद, दिव्यांगजनों और उनके परिवारों की वास्तविक आवश्यकताओं की पहचान की जाती है। हर व्यक्ति की ज़रूरत अलग हो सकती है – जैसे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा आदि।

3. योजना निर्माण (Planning)

पहचान के बाद CBR की एक विस्तृत योजना तैयार की जाती है जिसमें लक्ष्य, गतिविधियाँ, समय-सीमा और बजट तय किया जाता है।

4. सेवा प्रदाय (Service Delivery)

अब तय की गई योजनाओं के अनुसार सेवाएं दी जाती हैं – जैसे फिजियोथेरेपी, शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग, रोजगार के अवसर आदि।

5. प्रशिक्षण और जागरूकता (Training and Awareness)

CBR में समुदाय के लोगों, स्वयंसेवकों और परिवारजनों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे दिव्यांगजनों की मदद कर सकें और समाज में जागरूकता फैले।

6. निगरानी और मूल्यांकन (Monitoring and Evaluation)

CBR कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जाती है और यह मूल्यांकन किया जाता है कि लक्ष्य पूरे हो रहे हैं या नहीं। ज़रूरत पड़ने पर योजनाओं में सुधार किया जाता है।

7. आत्मनिर्भरता की ओर (Towards Self-reliance)

अंतिम लक्ष्य होता है कि दिव्यांग व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा हो जाए और किसी पर निर्भर न रहे।


इन चरणों को सही ढंग से अपनाने से CBR का उद्देश्य – एक समावेशी और समान समाज – पूरी तरह से सफल हो सकता है।


🧩 5. CBR के घटक / मैट्रिक्स (Components / Matrix of CBR) – विस्तार में

CBR (Community Based Rehabilitation) का उद्देश्य केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि दिव्यांग व्यक्तियों का समग्र विकास है। इसी सोच के तहत CBR को पाँच बड़े घटकों में बाँटा गया है। चलिए एक-एक कर सबकी गहराई में उतरते हैं:


1. स्वास्थ्य (Health) 🏥

CBR का पहला और सबसे बुनियादी घटक है स्वास्थ्य
स्वास्थ्य केवल शरीर की देखभाल तक सीमित नहीं है — यह मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक स्थिति को भी कवर करता है।

विस्तार:

  • दिव्यांग व्यक्तियों को अक्सर नियमित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच नहीं होती। इसलिए CBR का पहला काम होता है स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना

  • इसके तहत फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी जैसी सेवाएं दी जाती हैं।

  • मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को भी पहचाना और संबोधित किया जाता है।

  • CBR में समुदाय के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (जैसे ASHA, ANM) को प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे दिव्यांगजनों की नियमित देखभाल कर सकें।

  • पोषण, दवा वितरण और पुनर्वास उपकरण (जैसे व्हीलचेयर, वॉकर) भी इस घटक में आते हैं।


2. शिक्षा (Education) 📚

दूसरा महत्वपूर्ण घटक है शिक्षा, जो दिव्यांग बच्चों के जीवन को बदल सकती है।

विस्तार:

  • CBR का मकसद है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, चाहे उसकी अक्षमता कोई भी हो।

  • समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को बढ़ावा दिया जाता है, जिसमें दिव्यांग बच्चे सामान्य स्कूलों में अन्य बच्चों के साथ पढ़ते हैं।

  • जब ज़रूरत हो तो विशेष स्कूलों या संसाधन कक्षों (Resource Rooms) की व्यवस्था की जाती है।

  • ब्रेल, साइन लैंग्वेज, बड़ी छपाई, और ICT टूल्स जैसी विशेष सामग्री और तकनीकें उपलब्ध कराई जाती हैं।

  • शिक्षक प्रशिक्षण बहुत ज़रूरी होता है ताकि वो दिव्यांग बच्चों की ज़रूरतों को समझ सकें।

  • शिक्षा न केवल बच्चों तक, बल्कि बड़ों के लिए साक्षरता अभियान भी इसका हिस्सा हैं।


3. आजीविका (Livelihood) 💼

तीसरा स्तंभ है आजीविका, जो किसी भी व्यक्ति की आत्मनिर्भरता की कुंजी होती है।

विस्तार:

  • दिव्यांग व्यक्ति अक्सर बेरोज़गारी का शिकार होते हैं, या उन्हें कम वेतन दिया जाता है।

  • CBR उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) देता है जैसे – सिलाई, कढ़ाई, बागवानी, कंप्यूटर ट्रेनिंग आदि।

  • स्थानीय स्तर पर स्वरोज़गार योजनाओं, कुटीर उद्योगों और लघु ऋण सुविधाओं (Microcredit) से जोड़ने का काम होता है।

  • सरकार और निजी क्षेत्र में नौकरियों के लिए संपर्क, मार्गदर्शन और आरक्षण की जानकारी दी जाती है।

  • कौशल विकास के साथ-साथ उन्हें काम की जगहों पर समावेशी माहौल (inclusive work environment) भी दिया जाना ज़रूरी होता है।


4. सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) 🤝

CBR का चौथा स्तंभ है सामाजिक समावेशन, यानी दिव्यांगजनों को समाज में पूरी गरिमा और भागीदारी के साथ शामिल करना।

विस्तार:

  • भेदभाव, तिरस्कार, और अलगाव से लड़ने के लिए CBR सामाजिक जागरूकता फैलाता है।

  • सामाजिक कार्यक्रमों, त्योहारों, खेलों, सांस्कृतिक गतिविधियों में दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।

  • परिवार, स्कूल, पंचायत और समुदाय को संवेदनशील बनाकर समाज में समानता का वातावरण तैयार किया जाता है।

  • विवाह, सामाजिक निर्णयों और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच – ये सब भी सामाजिक समावेशन में आते हैं।

  • स्वयं-सहायता समूह (Self-help groups) के ज़रिए एकजुटता और आत्म-सम्मान को बढ़ावा मिलता है।


5. सशक्तिकरण (Empowerment) 💪

CBR का पाँचवां और सबसे गहरा असर छोड़ने वाला घटक है सशक्तिकरण, यानी दिव्यांगजनों को अपने जीवन के फैसले खुद लेने की शक्ति देना।

विस्तार:

  • सशक्तिकरण का मतलब है – जानकारी देना, आवाज़ देना, और आत्मविश्वास पैदा करना।

  • CBR में दिव्यांग व्यक्ति और उनके परिवार को उनके कानूनी अधिकार, सरकारी योजनाओं, और सामाजिक सेवाओं के बारे में बताया जाता है।

  • नेतृत्व प्रशिक्षण से उन्हें अपने अधिकारों के लिए बोलना सिखाया जाता है।

  • दिव्यांगजनों के संगठन (Disabled Persons’ Organisations – DPOs) बनाए जाते हैं ताकि वो नीति निर्माण और फैसलों में हिस्सा लें।

  • सशक्तिकरण केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे समुदाय का भी होता है — जब समाज मिलकर बदलाव लाता है।


🌪️ 6. CBR में चुनौतियाँ (Challenges in CBR)

CBR का सपना तभी हकीकत बनता है जब रास्ते में आने वाली मुश्किलों को सही से समझा और सुलझाया जाए। नीचे दी गई हर चुनौती किसी न किसी स्तर पर CBR के काम को धीमा कर देती है।


1. संसाधनों की कमी (Lack of Resources) 💸

CBR को ठीक से चलाने के लिए फंड, ट्रेनिंग, उपकरण, और मानव संसाधन चाहिए — पर हकीकत में ये सब बहुत कम या सीमित होते हैं।

विस्तार:

  • कई गाँवों और कस्बों में न तो पर्याप्त बजट होता है और न ही ज़रूरी उपकरण (जैसे wheelchairs, hearing aids)।

  • NGO और सरकारी कर्मचारी कई बार खुद अपनी जेब से खर्च करते हैं या बिना सुविधा के काम करते हैं।

  • ज़्यादातर परियोजनाएं दान और छोटे फंड पर निर्भर होती हैं, जिससे काम लंबे समय तक नहीं चल पाता।

👉 बिना हथियार के युद्ध लड़ने जैसा हो जाता है CBR बिना संसाधनों के।


2. प्रशिक्षण की कमी (Lack of Trained Personnel) 📚

CBR में जो लोग काम करते हैं – जैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सदस्य, शिक्षक – उन्हें अक्सर दिव्यांगता और पुनर्वास की सही ट्रेनिंग नहीं मिलती।

विस्तार:

  • कई बार उन्हें CBR की परिभाषा तक नहीं पता होती – न तो कानूनी जानकारी, न नैतिक समझ।

  • इसका नतीजा यह होता है कि सेवाएं आधी-अधूरी या गलत तरीके से दी जाती हैं।

  • अक्सर दिव्यांग व्यक्तियों को “दया का पात्र” मान लिया जाता है, जिससे उनका सशक्तिकरण नहीं होता।

👉 जो सिखाया नहीं गया, वो सिखाएगा कैसे? यही सबसे बड़ी रुकावट है।


3. सामाजिक भेदभाव और कलंक (Social Stigma and Discrimination) 😔

दिव्यांगता को आज भी समाज में “बोझ” या “पाप का फल” माना जाता है — ये सोच ही CBR की सबसे बड़ी दुश्मन है।

विस्तार:

  • गाँवों में दिव्यांग बच्चों को स्कूल में एडमिशन तक नहीं दिया जाता।

  • कुछ माता-पिता अपने ही बच्चे को बाहर नहीं निकलने देते, शर्म की वजह से।

  • विवाह, रोजगार, और सामाजिक जीवन में इन लोगों को बहुत पीछे रखा जाता है।

👉 CBR तभी सफल होगा जब सोच बदलेगी, दया नहीं – समानता की नज़र चाहिए।


4. समुदाय की उदासीनता (Community Apathy) 🧍‍♂️🧍‍♀️

CBR का नाम ही है “Community-Based”, लेकिन जब समुदाय ही निष्क्रिय हो जाए, तो कोई भी योजना दम तोड़ देती है।

विस्तार:

  • बहुत से लोग इसे "सिर्फ सरकार या NGO का काम" मानते हैं।

  • कोई स्थानीय लीडर अगर आगे न आए, तो CBR के कार्यक्रम कभी जड़ नहीं पकड़ पाते।

  • पंचायतें, स्कूल, या धर्मस्थल भी अक्सर सहयोग नहीं करते, जिससे दिव्यांगजनों का जीवन संकीर्ण हो जाता है।

👉 CBR तब तक अधूरी है, जब तक मोहल्ला-गांव उसका हिस्सा न बनें।


5. लंबे समय तक सहयोग की कमी (Lack of Sustainability)

CBR कोई एक दिन का प्रोजेक्ट नहीं – यह एक सतत प्रक्रिया है। लेकिन जब कोई योजना शुरू होती है, तो कुछ साल बाद ही बंद हो जाती है।

विस्तार:

  • दान देने वाले संस्था (donors) कुछ साल तक फंड देते हैं, फिर प्रोजेक्ट बंद कर देते हैं।

  • सरकार की योजनाएं बार-बार बदलती हैं, जिससे फॉलोअप या निरंतरता नहीं रहती।

  • इससे दिव्यांगजन फिर से वही हालात में लौट जाते हैं, जहां से शुरुआत की थी।

👉 CBR की असली परीक्षा तब है, जब फंड खत्म हो जाए और फिर भी काम चलता रहे।


6. प्रौद्योगिकी और डिजिटल पहुँच की कमी (Lack of Tech Access) 📵

आज की दुनिया डिजिटल हो गई है — लेकिन गाँवों और छोटे शहरों में दिव्यांगजनों को इस दुनिया में जगह नहीं मिल रही।

विस्तार:

  • ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल स्किल ट्रेनिंग, या टेली-रेहैब जैसी सेवाएं पहुंच ही नहीं पातीं।

  • बहुत से दिव्यांगजन मोबाइल या कंप्यूटर का इस्तेमाल करना नहीं जानते।

  • जो जानते भी हैं, उनके पास उपकरण नहीं होते — और जो उपकरण होते हैं, वे अनुकूल नहीं होते (Accessible नहीं होते)।

👉 Digital Divide अब एक नई दिव्यांगता बनती जा रही है।


7. नीतियों और क्रियान्वयन में अंतर (Policy vs Practice Gap) 📄✋

कई अच्छी-अच्छी नीतियाँ बनती हैं, कानून आते हैं, अधिकार मिलते हैं – लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग होती है।

विस्तार:

  • आरटीआई, RPWD Act जैसी चीज़ें कागज़ पर तो ज़बरदस्त लगती हैं, पर ज़्यादातर लोगों को पता तक नहीं होता कि उनके अधिकार क्या हैं।

  • जो अधिकारी या संस्थाएं इन पर काम करती हैं, वे भी कभी-कभी सिर्फ आंकड़े पूरे करती हैं, असल सेवा नहीं देतीं।

  • इससे नीतियाँ महज़ किताबों की बात बन जाती हैं।

👉 नीतियाँ तभी असरदार होती हैं, जब उन पर पूरी ईमानदारी से अमल हो।


🌈 7. CBR के  मुख्य क्षेत्र (7 Areas of CBR)


1. स्वास्थ्य (Health) 🏥

CBR में स्वास्थ्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दिव्यांगता की रोकथाम, पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी शामिल है।

विस्तार से:

  • दिव्यांगता के शुरुआती लक्षणों की पहचान और सही समय पर इलाज।

  • फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी जैसे रिहैब सेवाएं।

  • गांवों और समुदायों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रचार।

  • परिवारों को ट्रेनिंग देना कि कैसे वे घर पर ही देखभाल कर सकते हैं।

👉 स्वास्थ्य है तो सब कुछ है — CBR की पहली ज़मीन यही है।


2. शिक्षा (Education) 📚

CBR का मकसद है कि हर दिव्यांग बच्चा स्कूल जाए, और समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का हक पाए।

विस्तार से:

  • दिव्यांगजनों को सामान्य स्कूलों में एडमिशन और सहायता प्रदान करना।

  • शिक्षकों को स्पेशल एजुकेशन की ट्रेनिंग देना।

  • विशेष स्कूलों, होम-स्कूलिंग और ब्रेल/सांकेतिक भाषा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना।

  • शिक्षा में टेक्नोलॉजी का उपयोग जैसे — स्पीच सॉफ्टवेयर, मोबाइल एप्स आदि।

👉 पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया — और कोई पीछे न छूटे।


3. रोजगार और आजीविका (Livelihood) 💼

CBR यह सुनिश्चित करता है कि दिव्यांगजन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें — चाहे नौकरी से हो, स्वरोज़गार से या प्रशिक्षण से।

विस्तार से:

  • दिव्यांगजनों के लिए रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण (vocational training)।

  • सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ दिलाना।

  • स्वरोज़गार के लिए माइक्रो-फाइनेंस और कौशल विकास।

  • समाज में काम करने का सकारात्मक माहौल बनाना, भेदभाव खत्म करना।

👉 रोटी, कपड़ा, मकान — और इज़्ज़त की नौकरी सबको चाहिए।


✨ 8. CBR के अंतर्गत योजनाएँ और सुविधाएँ

(Schemes and Facilities under Community-Based Rehabilitation)


🔰 प्रस्तावना (Introduction):

CBR यानी सामुदायिक आधारित पुनर्वास (Community-Based Rehabilitation) का मकसद है कि हर दिव्यांग व्यक्ति को समाज का सम्मानजनक हिस्सा बनाया जाए, उसे उसके घर-समाज में ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे सभी जरूरी संसाधन और अवसर मिलें।

भारत सरकार और राज्य सरकारें मिलकर दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए कई तरह की योजनाएं और सुविधाएं शुरू करती हैं, जो सीधे समुदाय स्तर पर काम करती हैं — यानि CBR का हिस्सा बनती हैं।


🔹 भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्य योजनाएं और सुविधाएं


1. ✅ ADIP योजना (Assistance to Disabled Persons for Aids and Appliances Scheme)

उद्देश्य:
इस योजना का उद्देश्य है कि जो लोग दिव्यांग हैं और आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं, उन्हें ज़रूरत के उपकरण (जैसे – व्हीलचेयर, ट्राईसाइकिल, सुनने की मशीन, बैसाखी आदि) मुफ्त या रियायती कीमत पर दिए जाएं।

मुख्य बिंदु:

  • योजना का लाभ उन्हीं को मिलता है जिनकी मासिक आय ₹22,500 (ग्रामीण) और ₹30,000 (शहरी) से कम हो।

  • 40% या उससे ज्यादा दिव्यांगता होनी चाहिए।

  • शिविरों में आकर उपकरण वितरित किए जाते हैं।


2. ✅ दिव्यांगजन कौशल विकास योजना (Skill Development for Persons with Disabilities)

उद्देश्य:
इस योजना का मकसद है कि दिव्यांग युवाओं को ऐसे प्रशिक्षण कोर्स दिए जाएं, जिससे वे रोजगार पा सकें या खुद का काम शुरू कर सकें।

मुख्य बातें:

  • कंप्यूटर, सिलाई, मोबाइल रिपेयर, ब्यूटी पार्लर, टाइपिंग आदि की ट्रेनिंग दी जाती है।

  • कोर्स के दौरान स्टाइपेंड (₹1500 से ₹2500) भी दिया जाता है।

  • ट्रेनिंग सेंटर सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होते हैं।


3. ✅ राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना (National Scholarships for Students with Disabilities)

उद्देश्य:
दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाई में आर्थिक सहायता देना, ताकि वे स्कूल और कॉलेज तक की शिक्षा आसानी से पूरी कर सकें।

मुख्य बातें:

  • कक्षा 9 से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक के छात्रों को लाभ मिलता है।

  • छात्रवृत्ति के साथ-साथ किताबें, स्टेशनरी, होस्टल शुल्क आदि का खर्च भी दिया जाता है।

  • आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर होता है।


4. ✅ सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign)

उद्देश्य:
देश भर में सार्वजनिक स्थानों, सरकारी इमारतों, परिवहन, और डिजिटल सेवाओं को दिव्यांगजनों के लिए आसान और पहुंच योग्य बनाना।

उदाहरण:

  • स्कूलों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पतालों में रैम्प, ब्रेल संकेत, लिफ्ट आदि।

  • वेबसाइट्स को दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाना।

  • इसका मकसद है कि दिव्यांग व्यक्ति स्वतंत्र रूप से कहीं भी आ-जा सकें।


5. ✅ UDID परियोजना (Unique Disability ID Project)

उद्देश्य:
हर दिव्यांग व्यक्ति को एक डिजिटल पहचान पत्र (UDID Card) देना, जिससे सभी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

फायदे:

  • एक ही पहचान पत्र से सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जा सकता है।

  • ऑनलाइन सर्टिफिकेट दिखाकर किसी भी राज्य में सुविधा मिलती है।

  • आवेदन www.swavlambancard.gov.in पर किया जाता है।


6. ✅ दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना

उद्देश्य:
दिव्यांगजनों के विवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है।

मुख्य बातें:

  • अगर एक व्यक्ति दिव्यांग है, तो ₹25,000 – ₹50,000 तक की सहायता मिलती है।

  • अगर दोनों पति-पत्नी दिव्यांग हैं, तो सहायता राशि और भी ज्यादा हो सकती है।

  • यह राशि शादी के बाद आवेदन करने पर मिलती है (राज्य सरकार के नियम अनुसार)।


7. ✅ स्वावलंबन स्वास्थ्य बीमा योजना (Swavlamban Health Insurance Scheme)

उद्देश्य:
दिव्यांगजनों को कम कीमत पर स्वास्थ्य बीमा देना ताकि इलाज का खर्च उनके परिवार पर बोझ न बने।

मुख्य बातें:

  • ₹30,000 तक की बीमा राशि सालाना मिलती है।

  • इसमें दिव्यांग के माता-पिता भी शामिल किए जाते हैं।

  • नामित बीमा कंपनियां योजना चलाती हैं।


🔹 CBR के अंतर्गत दी जाने वाली अन्य सरकारी सुविधाएं

सुविधा विवरण
सरकारी नौकरी में आरक्षण केंद्र और राज्य सरकार की नौकरियों में 4% आरक्षण।
शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण स्कूल, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में सीटें आरक्षित।
आयकर छूट (Income Tax Benefits) धारा 80U और 80DD के अंतर्गत टैक्स में राहत।
यात्रा में रियायतें ट्रेन, बसों में फ्री या छूट वाली यात्रा की सुविधा।
सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, पेंशन आदि में प्राथमिकता।

📌 राज्य सरकारों की योजनाएं (कुछ उदाहरण)

राज्य योजना का नाम विवरण
उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन विवाह योजना शादी में ₹35,000 तक की सहायता।
बिहार दिव्यांग साइकिल योजना स्कूल/कॉलेज जाने के लिए फ्री साइकिल।
दिल्ली दिव्यांग पेंशन योजना ₹2,500 मासिक पेंशन।


📘 9. CBR स्रोतों की व्यापकता और पहचान

(Prevalence & Identification of CBR Sources)


✨ प्रस्तावना (Introduction):

CBR यानी सामुदायिक आधारित पुनर्वास का मकसद यह है कि दिव्यांगजनों को उनके अपने समुदाय में ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक समावेशन की सुविधाएँ मिलें। लेकिन इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए जरूरी है कि हम पहले यह जानें:

🔹 कितने लोग दिव्यांग हैं (Prevalence)?
🔹 और, समुदाय में किन-किन स्रोतों (Sources) के ज़रिये उनकी पहचान (Identification) की जा सकती है?

यहाँ से शुरुआत होती है CBR के सबसे ज़रूरी हिस्से की — डेटा इकट्ठा करना और सही लोगों तक पहुंच बनाना।


🔍 1. CBR की व्यापकता (Prevalence of CBR Needs)

“Prevalence” का मतलब होता है — किसी बीमारी, स्थिति या समस्या के फैलाव की संख्या।

CBR में यह देखा जाता है कि किसी गांव, कस्बे, जिले या राज्य में दिव्यांग व्यक्तियों की संख्या कितनी है और उनकी ज़रूरतें क्या हैं।

📊 भारत में दिव्यांगता की स्थिति:

  • भारत की कुल आबादी का लगभग 2.21% हिस्सा दिव्यांग है (जनगणना 2011 के अनुसार)।

  • WHO के अनुसार, विकासशील देशों में हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी रूप में दिव्यांगता से प्रभावित है।

  • दिव्यांगता के प्रकार:

    • शारीरिक दिव्यांगता

    • दृष्टि दोष

    • श्रवण दोष

    • मानसिक मंदता

    • बहु-विकलांगता आदि

🔁 क्यों ज़रूरी है Prevalence जानना?

  • CBR की योजना बनाने के लिए।

  • संसाधनों का सही उपयोग करने के लिए।

  • दिव्यांगजनों को समय पर सेवा देने के लिए।


🧭 2. CBR स्रोतों की पहचान (Identification of CBR Sources)

CBR को लागू करने के लिए समुदाय में मौजूद सभी संभावित संसाधनों (Sources) की पहचान करनी होती है। इसमें दो तरह के स्रोत शामिल होते हैं:


🔹 (A) मानव संसाधन स्रोत (Human Resources)

CBR में काम करने वाले लोग:

स्रोत भूमिका
👨‍⚕️ आशा कार्यकर्ता (ASHA) घर-घर जाकर जानकारी देती हैं, स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ती हैं।
👨‍🎓 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की स्क्रीनिंग, पोषण और स्कूलिंग की जानकारी देती हैं।
🧑‍🏫 स्कूल शिक्षक दिव्यांग बच्चों की पहचान और उन्हें समावेशी शिक्षा से जोड़ना।
🧑‍⚕️ स्वास्थ्य कर्मचारी प्रारंभिक जाँच, दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाना, प्राथमिक चिकित्सा।
🧑‍💼 पंचायत / ग्राम प्रधान सरकारी योजनाओं तक पहुंच में मदद।
🧑‍💻 NGO और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशिक्षण, काउंसलिंग और सेवाएं उपलब्ध कराना।

🔹 (B) भौतिक संसाधन स्रोत (Physical/Institutional Resources)

CBR में इस्तेमाल होने वाली जगहें और संस्थाएं:

स्रोत योगदान
🏥 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेकअप, इलाज, दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाना।
🏫 स्कूल और कॉलेज समावेशी शिक्षा, विशेष शिक्षक, वर्कशॉप्स।
🏠 समुदाय भवन / पंचायत घर CBR बैठकों, जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम।
🏢 NGOs और CBR केंद्र योजनाओं का क्रियान्वयन और पुनर्वास सेवाएं।
🧰 प्रशिक्षण केंद्र दिव्यांगजनों के लिए स्किल डेवलपमेंट।
🏦 बैंक और डाकघर आर्थिक सहायता, लोन, पेंशन योजनाएं।

🔍 3. CBR स्रोतों की पहचान के तरीके (Methods of Identification)

CBR कार्यकर्ता समुदाय में निम्नलिखित तरीकों से स्रोतों और लाभार्थियों की पहचान करते हैं:

📋 सर्वेक्षण (Survey):

  • घर-घर जाकर दिव्यांग व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाती है।

  • उनका नाम, पता, आयु, दिव्यांगता का प्रकार, ज़रूरतें आदि नोट किए जाते हैं।

🗂️ केस स्टडी (Case Study):

  • हर एक लाभार्थी की व्यक्तिगत जानकारी और स्थिति को समझा जाता है।

🧪 स्क्रीनिंग कैंप:

  • गाँवों में कैंप लगाकर दिव्यांगता की जांच की जाती है।

📢 समुदाय से बातचीत (Community Meetings):

  • ग्राम सभा, मोहल्ला मीटिंग, और पंचायतों में जानकारी ली जाती है।


📘10. CBR की फीडबैक और मूल्यांकन प्रक्रिया

(Feedback and Evaluation of CBR)


✨ प्रस्तावना (Introduction):

CBR यानी सामुदायिक आधारित पुनर्वास एक ऐसी प्रक्रिया है, जो दिव्यांगजनों को उनके समुदाय में ही पुनर्वास, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता दिलाने का प्रयास करती है। लेकिन कोई भी योजना तब तक सफल नहीं मानी जाती, जब तक उसका मूल्यांकन (Evaluation) न किया जाए और लोगों से फीडबैक (Feedback) न लिया जाए।

CBR में फीडबैक और मूल्यांकन इसलिए ज़रूरी हैं ताकि यह समझा जा सके कि:

  • योजनाएँ सही दिशा में चल रही हैं या नहीं।

  • लाभार्थियों को अपेक्षित मदद मिल रही है या नहीं।

  • क्या बदलाव ज़रूरी हैं?


📢 1. फीडबैक (Feedback) का महत्व:

फीडबैक का मतलब है — लाभार्थियों, समुदाय, कार्यकर्ताओं और स्टेकहोल्डर्स से प्रतिक्रियाएँ लेना
CBR में फीडबैक एक दो-तरफ़ा संवाद होता है जो बताता है कि योजना का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है।

✔️ क्यों ज़रूरी है फीडबैक?

  • वास्तविक समस्याएँ जानने के लिए

  • कार्यक्रम की गुणवत्ता सुधारने के लिए

  • कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग और प्लानिंग को बेहतर बनाने के लिए

  • लाभार्थियों की संतुष्टि समझने के लिए

  • पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए


📋 2. मूल्यांकन (Evaluation) क्या होता है?

मूल्यांकन यानी यह जाँचना कि CBR कार्यक्रम ने अपने लक्ष्यों को कितनी हद तक पूरा किया है

🔍 मूल्यांकन के प्रकार:

प्रकार विवरण
📅 प्रारंभिक मूल्यांकन (Baseline Evaluation) प्रोग्राम शुरू होने से पहले की स्थिति का आकलन
📈 निरंतर मूल्यांकन (Ongoing Evaluation) CBR प्रक्रिया के दौरान प्रगति का विश्लेषण
📊 समापन मूल्यांकन (Final Evaluation) प्रोग्राम के अंत में किए गए कार्यों का निष्कर्ष

🔧 3. फीडबैक और मूल्यांकन के तरीके (Methods):

🗣️ A. सहभागिता आधारित मूल्यांकन (Participatory Evaluation)

  • लाभार्थियों, समुदाय के सदस्यों और CBR कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाता है।

  • आम जनता से सीधा संवाद किया जाता है – बैठकें, चर्चा, फीडबैक फॉर्म आदि।

📝 B. केस स्टडी और रिपोर्टिंग

  • हर व्यक्ति की प्रगति को केस स्टडी के ज़रिये रिकॉर्ड किया जाता है।

📷 C. वीडियो/फोटो डाक्यूमेंटेशन

  • कार्यों के प्रमाण को फ़ोटो और वीडियो के ज़रिये संभालना।

✅ D. निगरानी सूची (Monitoring Checklist)

  • एक चेकलिस्ट तैयार की जाती है जिससे ये पता चलता है कि कौन-कौन से कार्य पूरे हुए हैं।

🗂️ E. लाभार्थी सर्वेक्षण (Beneficiary Survey)

  • लाभार्थियों से सवाल पूछकर उनकी राय जानी जाती है –
    जैसे:

    • क्या आपसे संपर्क किया गया?

    • क्या आपको मदद मिली?

    • सेवा से संतुष्ट हैं या नहीं?


📊 4. मूल्यांकन में देखे जाने वाले मुख्य संकेतक (Key Indicators):

CBR मूल्यांकन में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है:

संकेतक उद्देश्य
🎓 शिक्षा कितने दिव्यांग बच्चे स्कूल गए?
🏥 स्वास्थ्य कितनों को मेडिकल सहायता मिली?
💼 आजीविका कितनों को रोज़गार या प्रशिक्षण मिला?
👫 सामाजिक समावेशन क्या समाज में सहभागिता बढ़ी?
💰 आर्थिक सहायता कितनों को योजनाओं का लाभ मिला?

🔄 5. फीडबैक और मूल्यांकन से मिलने वाले लाभ:

  • कार्यक्रम को समय पर सुधारने का मौका मिलता है।

  • कार्यकर्ताओं को नई चुनौतियों की जानकारी मिलती है।

  • नीतिगत फैसलों के लिए ठोस आधार तैयार होता है।

  • लाभार्थियों का भरोसा बढ़ता है।


भाई, अब हम पहुँच गए हैं फाइल के अंतिम और सबसे ज़रूरी हिस्से पर —
जिसे कहते हैं “निष्कर्ष” (Conclusion)
और जैसा कि परंपरा है, इसको हम ना सिर्फ बढ़िया भाषा में लिखेंगे, बल्कि दिल से महसूस कराएंगे।


📘 11. निष्कर्ष (Conclusion of CBR Practical File)


🌿 प्रस्तावना (Preface to the Conclusion):

Community-Based Rehabilitation (CBR) यानी सामुदायिक आधारित पुनर्वास, कोई एक योजना या प्रोजेक्ट नहीं है।
यह एक दर्शन है, एक सोच है, और एक आंदोलन है, जो समाज को इस बात की याद दिलाता है कि —
"हर व्यक्ति चाहे वो शारीरिक रूप से अक्षम हो या मानसिक रूप से, समाज का उतना ही अहम हिस्सा है जितना कोई और।"


💬 मुख्य बिंदुओं का पुनरावलोकन (Summary of Key Learnings):

  • हमने CBR की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि समझी — कैसे यह विचार विकसित हुआ और भारत में इसका क्या स्थान है।

  • CBR के सिद्धांत (Principles) और घटक (Components/Matrix) को विस्तार से जाना।

  • इसके लक्ष्य, कार्यान्वयन के क्षेत्र, फीडबैक और मूल्यांकन, और सरकारी योजनाओं को गहराई से समझा।

  • साथ ही, CBR के सामने आने वाली चुनौतियों को भी पहचाना और उनके समाधान की दिशा पर विचार किया।


CBR की भूमिका और आवश्यकता:

आज की दुनिया में जहाँ समावेश (Inclusion) और समानता (Equality) की बातें की जा रही हैं,
वहाँ CBR जैसी प्रक्रिया ये साबित करती है कि बदलाव सिर्फ कागज़ों से नहीं,
बल्कि जमीनी स्तर पर, समाज की सोच बदलने से आता है।

CBR के माध्यम से:

  • दिव्यांगजनों को सम्मान, संपन्नता और स्वावलंबन मिलता है।

  • समाज को एक सजग, संवेदनशील और सहयोगी दृष्टिकोण अपनाने का अवसर मिलता है।

  • शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और सामाजिक सहभागिता जैसे मुद्दों को समुदाय-आधारित समाधान मिलते हैं।


🪔 भविष्य की दिशा (Way Forward):

CBR की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि:

  • हम किस हद तक समुदाय को जागरूक कर पाते हैं,

  • लोगों की सोच में कितना बदलाव ला पाते हैं,

  • और नीतियों को ज़मीन तक उतार पाते हैं।

CBR एक ऐसा रास्ता है, जो दिव्यांगता को दुर्बलता नहीं, बल्कि विशेषता और सामर्थ्य के रूप में देखने का नजरिया देता है।


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